रंग और वर्ण

Author Name : डाॅ॰ चंचला कुमारी
Volume : II, Issue :III,November - 2016
Published on : 2016-11-19 , By : IRJI Publication

Abstract :

अट्ठारहवीं शताब्दी से एशिया और अफ्रीका के देशों पर पाश्चात्य देशों के आधिपत्य इतिहास लेखन को प्रभावित किया है। शासक देशेां के बुद्धिजीवियों के शासित देशोें में बहुत अनुयायी हैं। पाश्चात्य समाज में वर्ग की अपेक्षा नस्ल को अधिक महत्व दिया जाता है। इसीलिए कहा गया है कि प्राचीन भारत में वर्णभेद का जन्म इसलिए कहा गया है कि प्राचीन भारत में वर्णभेद का जन्म इसलिए हुआ कि विदेश से आये हुये श्वेत लोग भारत के मूल अधिवासी कृष्णकाय लोगों से घृणा करते थे।