कृष्ण-काव्य में गंगाबाई का योगदान

Author Name : डाॅ0 फौज़िया नाज़
Volume : II, Issue :III,November - 2016
Published on : 2016-11-24 , By : IRJI Publication

Abstract :

प्राचीन भारतीय वाड़मय की सर्जनात्मक का इतिहास अपनी विरासत, धरोहर सभ्यता एवं संस्कृति के प्राचीनतम रूप में संजोये हुये है। इतिहास की इस सर्जनात्मक को जिन चरित्रों ने क्रियाषीत बनाया है उसमें श्रीराम और श्रीकृष्ण की भूमिकायें महत्वपूर्ण है। श्रीराम का चरित्र जहां आदर्श और मर्यादा से परिपूर्ण है वही श्रीकृष्ण का चरित्र मनोरंजन एवं माधुर्य से परिपूर्ण है। कृष्ण भक्ति में माधुर्य तथा वात्सल्य होने के नाम यह नारी-हृदय को अधिक प्रभावित कर गया डाॅ0 सावित्री सिन्हा का भी यही मत है- कि अधिकतर भक्त नारियां कृष्ण प्रेम से रस प्लापित हो गई तथा राम काव्य की बुद्धि प्रधान दार्शनिक पृष्टिभूमि की गहनता तथा गम्भीरता के कारण वे उसे अपना न सकी।