ऋग्वेद:सृष्टि और दृष्टि

Author Name : डॉ. मुकुल खंडेलवाल
Volume : II, Issue :V,January - 2017
Published on : 2017-01-03 , By : IRJI Publication

Abstract :

काव्य मींमासाकार आचार्य राजशेखर ने वेद तीन ही माना है - ऋक्, यजुष और साम। अथर्व चैथा वेद है किन्तु उसमें अधिकांश तथ्य इन्हीं तीन वेदों से गृहीत हैं। सामवेद में ऋग्वेद के हीं गेय मंत्रों का प्राधान्य है। ऋग्वेद में शारीरिक-मानसिक श्रम विभाजन नहीं है यह उसकी बड़ी विशेषता है। ऋग्वेद लगभग छत्तीस ऋषिवंशों के तीन सौ अठहतर ऋषि और उन्नतीस ऋषिकाओं की दस हजार चार सौ बहत्तर ऋचाओं का संग्रह है। ये ऋचाएँ एक हजार सत्रह सूक्तों और दस मण्डलों में विभक्त हैं। कई ऋषिओं की तीन-तीन पीढ़ियों ने ऋचाएँ गाई हैं। ये ऋचाएँ ऋषिओं से सुनकर उनके वंशजों और शिष्यों ने कंठस्थ रखी। अतः वेद श्रुति है। ऋचाएँ ऋषि-ऋषिकाओं ने स्वयं गाई है।